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जालंधर को रहता है बिहार के त्योहार का इंतजार, छठ पूजा को सजे 21 घाट

जालंधर में 25 साल पहले केवल सिद्ध शक्तिपीठ श्री देवी तालाब मंदिर में ही अस्थाई छठ घाट तैयार करके पूजन किया जाता था। आज अलग-अलग स्थानों पर 21 घाट तैयार किए गए हैं। करीब 55 हजार परिवार छठ पर्व कार्यक्रमों में शामिल होंगे।

शाम सहगल, जालंधर। महानगर में फोकल प्वाइंट, गदईपुर, इंडस्ट्रियल एस्टेट, इंडस्ट्रियल एरिया, लेदर कांप्लेक्स समेत औद्योगिक इलाकों में जैसे-जैसे उद्योग का विस्तार हुआ है, वैसे-वैसे छठ पूजा का दायरा भी बढ़ता गया। अधिकतर औद्योगिक प्रतिष्ठानों में मूल रूप से उत्तर प्रदेश तथा बिहार के लोग ही सेवाएं देते है।

ऐसे कई परिवार दशकों से शहर में रह रहे हैं तथा उनकी अगली पीढ़ी भी शहर से जुड़ चुकी है। ऐसे में छठ पूजा का दायरा भी बढ़ गया है। इसी कारण औद्योगिक इलाकों के आसपास गुजरने वाली नहर पर अस्थाई घाट तैयार किए जाते हैं। जहां पर पूजा सामग्री का बाजार भी सजाया जा रहा है।

किसी समय बिहार तथा उत्तर प्रदेश तक सीमित रहने वाले छठ पूजा का इंतजार अब देश-विदेश में भी रहता है। देश में मुंबई, दिल्ली, कोलकाता, सूरत, अहमदाबाद, बेंगलुरु सहित यह जालंधर में धूमधाम से मनाया जाता है। समय के साथ जिले में अब छठ पूजा का दायरा भी तेजी के साथ बढ़ा है।

साथ ही विभिन्न संस्थाओं द्वारा छठ पूजा को लेकर व्यापक स्तर पर आयोजन भी करवाए जाने लगे हैं। इससे तीन दिनों तक छठ घाटों पर उत्सव जैसा माहौल रहता है। उत्तर प्रदेश तथा बिहार के लोगों की जालंधर में संख्या बढ़ने के बाद शहर में जगह-जगह छठ घाट भी तैयार किए जाने लगे हैं।

ढाई दशक पूर्व केवल सिद्ध शक्तिपीठ श्री देवी तालाब मंदिर में ही अस्थाई छठ घाट तैयार करके पूजन किया जाता था। छठ पूजा को लेकर शहर में एक दर्जन से अधिक घाट तैयार किए जाते हैं। सूर्य उपासना को लेकर रखे जाते व्रत की परंपरा जालंधर में तेजी के साथ विकसित हुई है।

कुछ सालों में ही छठ पूजा को व्यापक स्तर पर मनाया जाने लगा है। दीपावली तथा भैया दूज के बाद भी शहर के बाजारों में खरीदारी का दौर भी जारी रहता है। केवल पूजा सामग्री ही नहीं बल्कि व्रत रखने वाली महिलाएं नए वस्त्र खरीदने से लेकर शृंगार तक की खरीदारी करती हैं।

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