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उपचुनाव में दोनों सीटों पर RJD उम्मीदवार:महागठबंधन ने दिखाई एकजुटता, गोपालगंज से मोहन प्रसाद को टिकट

बिहार में दो सीटों पर होने वाले विधानसभा उपचुनाव में महागठबंधन ने राजद के उम्मीदवार उतारने का फैसला किया है। मोकामा से नीलम देवी चुनाव लड़ेंगी और गोपालगंज से मोहन प्रसाद गुप्ता लडेंगे। दोनों तीन नवंबर को उपचुनाव होंगे। महागठबंधन की पार्टियों राजद, जदयू, हम और लेफ्ट पार्टियों ने बैठक की और राजद कार्यालय में एकजुटता दिखाते हुए राजद कार्यालय में उम्मीदवारों की घोषणा की।

बैठक में जदयू के प्रदेश अध्यक्ष उमेश कुशवाहा, हम सुप्रीमो जीतन राम मांझी, राजद के वरिष्ठ नेता भोला यादव, माले के वरिष्ठ नेता धीरेन्द्र झा आदि खास रूप से उपस्थित रहे।

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2019 में मुंगेर लोकसभा चुनाव लड़ चुकी हैं अनंत सिंह की पत्नी

मोकामा में राजद के अनंत सिंह को एके 47 से जुड़े मामले में सजा हो जाने की वजह से उन्हें चुनाव लड़ने से वंचित होना पड़ा और यह सीट खाली हुई। अब इस सीट पर उनकी पत्नी नीलम देवी महागठबंधन की उम्मीदवार होंगी। नीलम देवी 2019 मे कांग्रेस के टिकट पर लोक सभा का चुनाव लड़ चुकी हैं। लेकिन उन्हें हार का सामना करना पड़ा था।

उपचुनाव के लिए महागठबंधन के नेताओं ने एकजुटता दिखाई है

गोपालगंज में भाजपा के सुभाष सिंह के निधन से सीट खाली हुई है। सुभाष सिंह ने साधु यादव को चुनाव में हराया था। 2020 में कांग्रेस ने गोपालगंज सीट पर अपना उम्मीदवार दिया था। कांग्रेस उम्मीदवार आसिफ गफूर ने तब तीसरा स्थान हासिल किया था। इसलिए इस सीट पर महागठबंधन की कई पार्टियों की दावेदारी चल रही थी, लेकिन महागठबंधन में तय हुआ कि यह सीट भी राजद को ही दी जाए।

वैश्य सहित यादव-मुस्लिम वोटरों पर मोहन प्रसाद की पकड़ अच्छी

गोपालगंज से राजद या महागठबंधन के उम्मीदवार मोहन प्रसाद गुप्ता पेशे से सोना-चांदी के बड़े व्यवसायी हैं। वे राजद के पुराने विश्वासी रहे हैं। जेपी आंदोलन के समय उन्होंने छात्र राजनीतिक से अपने करियर की शुरुआत की थी। वे लालू प्रसाद यादव और तेजस्वी यादव के करीबी माने जाते हैं। पिछले विधानसभा चुनाव में गोपालगंज से वे दावेदार थे, लेकिन कांग्रेस के खाते में सीट जाने की वजह से मोहन प्रसाद गुप्ता चुनाव नहीं लड़ पाए थे। उपचुनाव में राजद ने इन पर भरोसा दिखाया है। वैश्यों के वोट बैंक पर राजद की पूरी नजर यहां है। वे वैश्य महासभा के प्रदेश उपाध्यक्ष हैं। यादव और अल्पसंख्यकों के वोट बैंक पर भी अच्छी पकड़ रखते थे।

बता दें कि भाजपा ने मोकामा के साथ-साथ गोपालगंज में भी अपने उम्मीदवार के नाम की घोषणा कर दी है। मोकामा में ललन सिंह की पत्नी सोनम देवी पार्टी की उम्मीदवार हैं तो गोपालगंज में कुसुम देवी को प्रत्याशी बनाया गया है। ललन सिंह ने हाल ही में जदयू छोड़ भाजपा की सदस्यता ली है।

वहीं सरकार बनने के बाद 24 सितंबर को डिप्टी सीएम और राजद सुप्रीमो के बेटे तेजस्वी यादव गोपालगंज दौरे पर गए थे। यहां उन्होंने थावे मंदिर में हाजिरी लगाने के साथ अपने पैतृक गांव भी गए थे। इस दौरान यहां उन्होंने जिले के लिए 500 करोड़ के मेडिकल कॉलेज समेत 600 करोड़ के दूसरे विकास कार्यों की सौगात दी थी। ऐसे में यह माना जा रहा है कि महागठबंधन चुनाव से पहले अपना चाल चल चुका है।

आखिरी बार 2000 में जीती थी आरजेडी

गोपालगंज विधानसभा सीट पर पिछले 4 चुनाव से बीजेपी का दबदबा है। 2005 से यहां सुभाष सिंह चुनाव जीतते आ रहे थे। 2020 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी के सुभाष सिंह ने बसपा के उम्मीदवार साधु यादव को 36 हजार के वोटों के अंतर से हराया था। आखिरी बार 2000 में साधु यादव आरजेडी के टिकट से यहां से जीते थे। महागठबंधन के उम्मीदवार रहे कांग्रेस के आसिफ गफूर को तब मात्र 36 हजार वोट मिले थे।

1995 से 2005 तक यहां आरजेडी का चलता था सिक्का

भले ही 2020 में तेजस्वी ने गठबंधन के नाते गोपालगंज सदर सीट कांग्रेस को दे दी, लेकिन प्रदर्शन और सीट के पुराने रिकॉर्ड के कारण राजद का दावा भी यहां कमजोर नहीं है। 2005 के नवंबर में हुए चुनाव में सुभाष सिंह ने पहली बार जीत दर्ज की। इससे पहले के तीन चुनावों में सीट RJD के पास ही रही थी। इस सीट से 1995 में राम अवतार विधायक बने तो 2000 में साधु यादव ने जीत दर्ज की। फरवरी 2005 में हुए चुनाव में RJD के रेयाजुल हक राजू ने जीत दर्ज की थी।

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