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एक युवा दंपति ने पहाड़ बचाने के लिए 3200 किमी की पैदल लद्दाख यात्रा पूरी कर मिसाल पेश की

रुमनी घोष, नई दिल्ली: कोरोना के दौरान जब सभी अपने-अपने घर के कमरे में कैद थे, तब पुणे में रहने वाले निखिल सावलापुरकर और परिधि गुप्ता अपने जीवन के सबसे बेहतरीन अनुभव की प्लानिंग कर रहे थे। घूमने-फिरने के शौकीन इस दंपति ने मिलकर लद्दाख की पैदल यात्रा करने का मन बनाया। करीब एक साल की प्लानिंग और छोटी-मोटी तैयारियों के बाद वह निकल पड़े। नौ महीने में 3200 किमी चलकर हाल ही में उन्होंने अपनी यात्रा पूरी कर लोगों के सामने एक अलग ही मिसाल पेश की।

मूलत: मध्य प्रदेश के रहने वाले इस युवा दंपति ने सपने में भी नहीं सोचा था कि कार्पोरेट वर्ल्ड से बाहर आकर शुरू किया गया एक छोटा सा अभियान उनके जीवन जीने के तरीके को इस कदर बदल सकता है। अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर यात्रा का अनुभव लिखते हुए परिधि बताती हैं ‘ हम वर्ष 2019 में कोरोना महामारी फैलने से पहले एक बार लद्दाख गए थे, हालांकि वह ट्रिप इतना खास नहीं था। हमें लगा कि इतने समय कम समय में हम कोई नई जगह नहीं देख पाए। न ही हम वहां के लोकल लोगों और व्यंजनों आदि के बारे में जान पाए। कोरोना महामारी के दौरान वर्ष 2020 के शुरुआती दौर में जब ‘वर्क फ्राम होम’ शुरू हुआ तो हम दोनों ने तय किया कि जब दफ्तर नहीं जाना है तो घर क्यों. कहीं पहाड़ पर जाकर काम किया जाए। हालांकि हमारे मन में संशय था कि शायद हम काम पर फोकस नहीं कर पाए। इस द्वंद के बीच एक दिन ऐसे में हमने दोबारा लद्दाख जाने और अपनी अधूरी इच्छाओं को पूरा करने का मन बना ही लिया।

यात्रा पर निकलने से एक साल की प्लानिंग, शोध और कसरत

लंबी पैदल यात्रा पर जाने वालों के लिए तैयारियों की एक लंबी सूची का उल्लेख करते हुए परिधि ने लिखा है कि जिस वक्त हम यह प्लानिंग कर रह थे, तब मैं काम से सिलसिले में इंडोनेशिया में रह रही थी और निखिल पुणे में। हमने पहाड़ पर जाने का मन बना लिया था, लेकिन उसके लिए तैयारी जरूरी थी। हमने व्हाट्सएप ग्रुप के जरिये इस पर शोध किया। पैदल यात्रा का मार्ग क्या होना चाहिए, इस बारे में जानकारी जुटाई। लगभग एक साल तक इसकी प्लानिंग की। इसके बाद मैं भारत लौट आई। पहाड़ पर चलना या रहना आसान नहीं होता है, इसलिए खुद को फिजिकली फिट रहने के लिए नियमित व्यायाम करना शुरू किया। यात्रा हो या कोई भी काम, इसकी तैयारी कितनी अहम है, इसका उल्लेख करते हुए निखिल बताते हैं हमारा फ्लैट 11वीं मंजिल पर था। हम दोनों ने सीढ़ियों से आना जाना शुरू किया। इसके अलावा हमने योग और फेफड़ों को मजबूत करने वाली ब्रीदिंग एक्सरसाइज भी की। परिधि कहती हैं जुलाई 2021 को हमने मनाली से अपनी पैदल यात्रा की शुरुआत की थी। करीबन हर दिन 20 से 22 किमी पैदल चलते थे। हमने एक मैप प्लान बनाया था, लेकिन हमने अपनी यात्रा को किसी नियम में नहीं बांधा था। कभी कोई गांव उन्हें बेहद पसंद आता, तो वे वहां रुक जाते।

तार गांव के लोगों ने जीना सिखाया

आज हम कार्बन उत्सर्जन पर चर्चा कर रहे हैं, उसके लिए पहाड़ों से घिरे तार गांव के लोगों की जीवनशैली को देखना चाहिए। उस गांव में नौ घर हैं और उन लोगों ने ही हमें सस्टेनेबल तरीके से जीवन जीना सीखाया। यह यात्रा का सबसे रोमांचक अनुभव था। साथ ही 14 घंटों तक हिम तेदुएं को देखने का अनुभव भी अलग था। नवंबर 2021 तक निखिल और परिधिन सियाचिन तक पहुंच चुके थे लेकिन उस समय निखिल को अपनी बहन की शादी के लिए कुछ समय के लिए वापस घर आना पड़ा। उसके बाद फिर दोबारा यात्रा शुरू की थी।

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